Friday, 18 July 2025

मेरे पसंदीदा काम से भी मेरा मन क्यों भर जाता हैं?

वेल, नाकामयाबी अक्सर ऐसा करती है...

हम किसी को देखते हैं कुछ करते हुए — जैसे कोई स्पोर्ट खेलना, डान्स, सिंगिंग, रीडिंग, राइटिंग, कुकिंग, वर्कआउट, योगा, ट्रेकिंग, हाइकिंग, कोई म्यूज़िकल इंस्टूमेंट बजाना, नयी लैंग्वेज या टेक का कुछ नया सीखना — और हम उस चीज़ की तरफ अट्रैक्ट हो जाते हैं...

उस अट्रैक्शन के चलते, हम रोज़ाना/अल्टरनेट दिन पर/हफ्ते में दो बार या कोई तरीक  का एक इंपल्स कमिटमेंट कर लेते हैं।

वो कमिटमेंट पहले-पहले बहुत खुशी देता है... क्योंकि ये वही चीज़ है जो हम कबसे करना चाहते थे — हमारा इन्टरेस्ट जानकर इंस्टा रील्स और फेसबूक फीड्स रोज़ हमारे लिए नए नए विडिओ की पेशकश सजाकर रखता है...

इस वजह से इनिशिअली अपने इंटरेस्ट वाले एरिया को एक्स्प्लोर करना एक खुशनुमा सफर सा लगता है, क्योंकि तब आप ख़याली पुलाव पकाने की बजाय एक्चुअल कढाइ में चम्मच घूमना शुरू करते हो 

उस मोमेंट पे, आप उन मिलियन लोगों से आगे हो जो सोफा पे बैठे हैं और बस स्वाइप अप --- स्वाइप अप --- स्वाइप अप कर रहे हैं... कूडोज़ टू यू, कि आपने स्क्रीन से नज़र हटाके कुछ करने का फ़ैसला लिया...

पर दिक्कत ये है कि हम मन में ये एक्सपेक्टेशन लेकर चलते हैं कि पहले कुछ अटेंप्टस् में ही हम इग्ज़ैक्ट निशाना साध लेंगे 🎯 लेकिन जल्द ही हम्हें रियलाइज़ होता है कि वो चार्मिंग वीडियो हमारी रियलिटी इतनी जल्दी नहीं बनने वाली।

अब असली सवाल ये है — "क्या हमारे पास उतनी पर्सिस्टेंसी है... एफर्ट और पेशन्स है... कि हम फिर से एक और बेस्ट शॉट दोगे — और देते रहें बस ये सीख पाने के लिए कि सक्सेस कोई रेडी-मेड केक स्लाइस जैसे हमारे प्लेट में सजा सजाया नहीं आ पहूँचता.."

बल्कि, उस सक्सेस नामक केक को हम्हें एकदम राॅ मटेरिअलस् से कडी लगन और अविरत परिश्रम से खुद बनाना पडता है।

जैसे,
स्टोर पर जाकर फाइन इंग्रीडिएंट्स इकट्ठा करना,
इस्तेमाल करने से पहले उन्हें रिफाइन करना,
पॉट में एग्जैक्ट पोर्शंस में पहले साॅलिड इंग्रीडिएंट्स डालना और अच्छी तरह मिक्स कर लेना...
फिर लिक्विड इंग्रीडिएंट्स डालना और व्हिस्क करते जाना...
बैटर की परफेक्ट कंसिस्टेन्सी बनाना और थोड़ा साइड पे रखना, उसके टर्न का वेट करते हुए...

दुुरी तरफ कढाई को फ्लेम पर चढाना और उसे परफेक्ट टेम्परेचर पर आने देना...
इस बीच, केक के पॉट में ऑइल लगाना, उसे डस्टिंग कर नॉन-स्टिकी बनाना...

फिर बैटर को पाॅट डालना और उसे टॅप टॅप कर, कढाई में रखना....
क्लॉक सेट करकर उसे बेक होने देना।

और फिर जरूरी है पेशन्सभरा इंतजार.... सही से पकने तक का इंतजार....... माने जब तक क्लॉक जीरो न हो जाए, तब तक उसके साथ पी-का-बू खेलते ना बैठना।

ये बेकींग टाईम बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर हमने टाइम का ट्रैक मिस कर दिया ---------- तो ओवर कॉन्फिडेंस से बेक किए गए ओवर बर्न कलमुँहे केक का आनंद लेना पड जाएगा...

अगर हमने इसे कुक होने के लिए इनफ टाइम नहीं दिया ----------- तो अपनी आधी प्रिपेयर्डनेस की तरह हाफ बेक्ड केक का लुफ्त उठाना होगा ...

कभी बेक टाइम बिल्कुल परफेक्ट होने के बावजूद, इंग्रीडिएंट्स में कुछ मिस या एक्सेस के कारण, केक या तो जिगली होगा या सैगी होगा या रॉकी-हार्ड हो जाएगा या कभी गलती पकड में नही आ रही पर वेल-समथिंग-इज-नॉट-राइट टाइप का केक सामने पडा मिलेगा

देखो यारा, "वो एकदम राइट कलर, राइट टेक्सचर, राइट अरोमा, राइट टेस्ट वाला केक हमारे फर्स्ट ट्रायल में तो कभी नहीं बनने वाला..."

ऐसे में, रिवाइज़्ड प्रोसिजर और प्रॉपर प्रिपरेशन और परफेक्ट बेक टाइम के साथ एक और, फिर एक और ऐसे डजनभर ट्राई करते रहना हर किसी के बस की बात नहीं।

कुछ पहले ही नहीं, पर कुछ ट्रायल्स में "छोडो, हम से ना हो पाई है" कहकर गिव अप कर सकते हैं....

पर कुछ लोग होंगे जिन्होने अपने हर "तुमसे ना हो पाई" है वाले थाॅट से उभर कर फिर नए से कोशिश करने का जज्बा दिखाया, और दोस्तो आखिरकार उन्हेही "देखो मैंने कर दिखाया" वाला केक चाव से खाते आया।

अब परफेक्ट रेसीपी का सिक्रेट पाकर कुछ लोग एक्सप्लोर करना बंद कर देंगे और अपनी ज़िंदगी की एटर्निटी के लिए उसी एक रेसिपी को फॉलो करने में बीता देंगे..

दुसरी तरफ कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी लोग अब परफेक्ट फ्रॉस्टिंग बनाने, और दूसरे फ्लेवर्स का मॅजिक ढूंढने और उस फिल्ड में अपनी खुद की स्टाइल बनाने की और हर मुमकिन कोशिशमें जुट जाएंगे...

और पता है, वे ही वो लोग हैं जो हमारे इंस्टा और एफबी फीड्स में अपने नए नए आविष्कार लेकर आएंगे, जो उसे ये तो बच्चों खेल जितना एफर्टलेस बतलाएंगे...

उनके एफर्टलेस फेसेस को देखकर हम्हें लगता है कि यह इजी है...... जो हम नहीं देखते वो ये है कि सौदफा करने पर इसे करना इजी है, पहले कुछ बैचेस के उनके भी फ्लाॅप शो साबित हुए होंगे।

तब ये कहना कि मैंने इंटरेस्ट खो दिया और गिव अप करना इजी है, जब कि आधे मन से ट्राई करते रहना ये भी बेटर नहीं है...

पर गिव अप करने के बजाय, उस पहले दिन वाली एनर्जी को हर दिन बनाए रखीए और अपनी गलतियों सीखते हुए, हर बार बेटर करने की कोशिश में लगे रहें... भले ही आपके किचन टॉप पर बिघडे हुए केक्स के बैचेस का ढेर क्यों ना पडा हो... यही तो "माय-वेरी-ओन-परफेक्ट-पीस-ऑफ-केक" का आनंद पाने का एकमात्र तरीका है...

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